गुरुवार, दिसंबर 23, 2010

पानी । जो वास्तव में अमृत था ?

आज से 500 वर्ष पहले पीपा नाम का एक क्षत्रिय राजा हुआ । जो राजपूत था । ये कबीर के समय से थोडे समय बाद की बात है । उस समय सुरति शब्द योग यानी सहज योग का प्रचार जोरों पर था । कबीर साहब प्रथ्वी छोडकर वापस सतलोक जा चुके थे । रैदास जी अभी सशरीर थे । रैदास जी । मीरा जी । धर्मदास आदि द्वारा सहज योग के प्रचार से जन जन को इसकी जानकारी हो चुकी थी । सिकन्दर लोदी के अपने धार्मिक गुरु शेख तकी सहित कबीर के चरणों में गिर जाने के बाद और उससे पहले भी काफ़ी संख्या में मुसलमानों ने भी सहज योग अपनाया । जिनमें मगहर का राजा बिजली खां पठान भी था । तो साहब । चारों ओर सहज योग का बोलबाला देखकर पीपा राजा के मन में भी आया कि वह भी किसी अच्छे महात्मा से नाम का उपदेश लेकर नाम की कमाई करे । और अपना उद्धार करे । उसने लोगों से किसी अच्छे महात्मा के बारे में पूछा । लोगों ने कहा । कि अच्छे महात्मा में कबीर साहब को शरीर छोडे समय हो चुका है । इस समय उनका चेला रैदास ही अच्छा महात्मा है । राजा ने सोचा कि अगर चमार को गुरु बनाता है । तो प्रजा पर असर पडेगा कि राजा चमार हो गया है ? पर इस समय दूसरा कोई पहुंचा हुआ संत है नहीं । इसलिये जाना भी जरूरी है । इसलिये छुपकर ऐसे टाइम जाऊंगा । जब किसी को पता ही न लगे । एक बार ऐसा मौका आ गया । कोई मेला लगा था । सब जनता मेला चली गयी । पर राजा न गया । वह छुपता छुपाता रैदास के घर पहुंचा । और बोला । गुरूजी नामदान दे दो । उस समय रैदास चमढा भिगोने के कुन्ड में पानी भर रहे थे । उनके हाथ में मिट्टी का सकोरा था । उन्होने राजा से कहा । ले पहले पानी पी ले । क्योंकि महात्मा का रौब और वाणी ही अलग होती है । अतः पीपा कैसे मना कर पाता । बोला । लाइये महाराज । रैदास ने उसे ओक ( अंजुली ) से पानी पिलाया । ( पानी । जो वास्तव में अमृत था ? ) । पर राजा के मन में चमार वाली बात भरी हुयी थी । उसने मुंह दूसरी ओर करके कुरते की आस्तीन के सहारे वह पानी मुंह से बाहर गिरा दिया । इस तरह बहुत सा पानी कुरते की बांह में लग गया । और उसके अजीब दाग से बन गये । राजा ने सोचा । इसने तो मेरा क्षत्रिय धर्म ही भृष्ट कर दिया । अपने घर का पानी पिलाकर मुझे चमार ही बना दिया । रैदास जी ये बात जान गये । पर उन्होंने पीपा से कुछ नहीं कहा । और चुप ही रहे । राजा ने घर आकर तुरन्त अपना कुरता उतारा । और धोबी को बुलाकर कहा । जा इसको जल्दी धोकर ला । और ध्यान रहे । इस बात की किसी को कानोंकान भी खबर न हो । जी महाराज । कहकर धोबी वस्त्र लेकर चला गया । पहले के समय में जो दाग उतरते नहीं थे । उसे धोबी मुंह में लेकर चूसते थे । इसलिये धोबी खुद मसाला ( कपडे धोने का ) तैयार करने लगा । और अपनी लडकी से बोला । ये दाग चूस चूसकर निकाल । लडकी छोटी ही थी । अतः दाग को चूसने के बाद । थूकने के बजाय पीती चली गयी । ज्यों ज्यों पानी उसके शरीर में जा रहा था । उसके अन्दर प्रकाश होने लगा । माया के परदे उतरने लगे । और ग्यान का प्रकाश होता गया ।..कुछ ही समय में लडकी अलौकिक ग्यान की बातें बोलने लगी । उसकी वाणी में दिव्यता प्रकट हो गयी । चारों तरफ़ ये बात फ़ैल गयी कि फ़लाने धोबी की लडकी तो बहुत ऊंची महात्मा हो गयी । ये खबर राजा के पास भी गयी । उसे आश्चर्य हुआ । उसे महात्माओं के पास जाने का शौक तो लग ही गया था । फ़िर चमार के घर जाने में तो मुश्किल थी । पर धोबी के घर जाने में कोई मुश्किल न थी । रात को राजा फ़िर छुपकर धोबी के घर पहुंचा । उसे देखते ही धोबी की लडकी तुरन्त उठकर खडी हो गयी । पीपा झिझकता हुआ सा बोला । बीबी मैं तेरे पास राजा बनकर नहीं भिखारी बनकर आया हूं । वह लडकी बोली । मैं आपको राजा समझकर उठकर खडी नहीं हुयी । बल्कि आपकी जाति से । आपकी वजह से । जो कृपा मुझ पर हुयी । उसके लिये मैं उठकर खडी हुयी । पीपा हैरान हो गया । मेरी जाति की वजह से । मेरी वजह से ..? हां राजा । लडकी ने कहा । जो रहस्य । जो कृपा । आपके कुरते की बांह में थी । उसे मैंने चूस लिया । उसी कृपा से यह हुआ । ..राजा मन में विचार करने लगा कि वह तो पानी था । जो रैदास जी उसको पिला रहे थे । और वह सोच रहा था कि उसका धर्म भृष्ट कर दिया । तब राजा मन ही मन अपने आपको धिक्कारने लगा । मुझे धिक्कार है । मेरे राज को धिक्कार है । मेरे कुल को धिक्कार है ।.. अब उसने लोकलाज की परवाह न की । और उसी समय दौडा दौडा रैदास जी के पास पहुंचा । और बोला । महाराज जी । फ़िर से वही कुन्ड का पानी पिला दीजिये । रैदास जी ने कहा । अब वह पानी नही मिल सकता । वह तो उसी समय के लिये था । वह कुन्ड का पानी नहीं था । वह सचखन्ड से लाया हुआ अमृत था । जब तू मेरे पास पहली बार आया । मैंने सोचा कि ये क्षत्रिय राजा है । राज छोडकर आया है । इसे कोई खास चीज दूं ।..मगर अब नाम ले । और उसकी कमायी कर ।.. इस तरह रैदास जी ने पीपा को नामदान दिया । और उसने अच्छी कमाई भी की । भक्त पीपा की वाणी गुरु ग्रन्थ साहब में संग्रहीत है ।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...