रविवार, मार्च 20, 2011

बोलिये..क्या मैं ईश्वर को पुकारूँ

एक दिन एक गङरिये ने ईसामसीह से कहा । मैं पापी हूँ । और भूलाभटका हुआ भी हूँ । क्या परमात्मा मुझे भी उबारेगा । या नहीं ? क्योंकि मैं इस योग्य नहीं हूँ । बोलिये जीसस । बोलिये..क्या मैं ईश्वर को पुकारूँ । तो वह मेरी पुकार सुनेगा ?
ईसामसीह ने कहा । भाई तुम शाम के समय जब अपनी सारी भेङों को इकठ्ठा करके घर की तरफ़ वापस जाते हो । तो क्या तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है कि तुम्हें पता चला हो कि तुम्हारी 100 भेङ में से 99 भेङ ही हैं । और 1 भेङ जंगल में ही कहीं पर छूट गयी है । गङरिया बोला । जी हाँ कई बार ऐसा हुआ है । ईसामसीह ने पूछा । तो भाई तुम उस समय क्या करते हो ?
गङरिया बोला । उसी एक भेङ को खोजने लगता हूँ कि वह कहाँ गयी ? कोई भेङिया उसे खा न जाय । यह सोचकर जंगल की तरफ़ भागता हूँ । उस एक भेङ की फ़िकर मेरे दिमाग में ऐसी गूँजने लगती है कि मैं 99 भेङों की फ़िकर ही भूल जाता हूँ । रात में चिल्ला चिल्लाकर मैं उसे जंगल पहाङ से खोज लाता हूँ । ईसामसीह ने पूछा । तुम उसे  कैसे लाते हो ?
कंधे पर रखकर लाता हूँ । गङरिया फ़िर से बोला ।
इस पर ईसामसीह ने कहा । तो क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि ईश्वर तुम्हारे लिये इतना भी प्रेम नहीं करेगा ।
वह सदा हम पर अपनी प्रेम दृष्टि रखता है । और हमेशा हमें देखता रहता है । इस पर वह गङरिया संतुष्ट हो गया ।

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