सोमवार, सितंबर 06, 2010

महाराज जी के प्रवचन से गूढ दोहे


राम खुदा सब कहें । नाम कोई बिरला नर पावे । है । बिन अक्षर नाम । मिले बिन दाम । सदा सुखकारी ।बाई शख्स को मिले । आस जाने मारी ।
बहुतक मुन्डा भये । कमन्डल लये ।
लम्बे केश । सन्त के वेश । दृव्य हर लेत । मन्त्र दे कानन भरमावे ।
ऐसे गुरु मत करे । फ़न्द मत परे । मन्त्र सिखलावें ।
तेरो रुक जाय कन्ठ । मन्त्र काम नहि आवे । ऐसे गुरु करि भृंग । सदा रहे संग । लोक तोहि चौथा दरसावें ।
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जहां लगि मुख वाणी कहे । तंह लगि काल का ग्रास । वाणी परे जो शब्द है । सो सतगुरु के पास ।
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कोटि नाम संसार में । उनसे मुक्ति न होय । आदि नाम जो गुप्त है । बूझे बिरला कोय ।
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कृत रत नाम जपे तेरी जिह्वा । सत्य नाम सतलोक में लियो महेशी जानि ।
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इन्ड पिन्ड ब्रह्मान्ड से न्यारा । कहो कैसे लख पायेगा । गुरु जौहरी जो भेद बतावे । तब इसको लख पायेगा ।
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घाट घाट चले सो मानवा । औघट चले सो साधु । घाट औघट दोनों तजे । ताको मतो अगाध ।
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अलख लखूं । अलखे लखूं । लखूं निरंजन तोय । हूं सबको लखूं । हूं को लखे न कोय ।
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तोमें राम । मोमें राम । खम्ब में राम । खडग में राम । सब में राम ही राम । श्री महाराज जी के प्रवचन से ..।
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लेखकीय - इधर व्यस्तता अधिक है । ब्लाग्स का कार्य न के बराबर हो रहा है । सतसंग में सुने गये दुर्लभ
रहस्य को आपके लिये संक्षेप में प्रकाशित कर रहा हूं ।

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