मंगलवार, अगस्त 17, 2010

इस कंकाल का रहस्य क्या है ?


आइये आज कुछ अलग रहस्यों की बात करते हैं । जिन पर साधारण जीवन में चर्चा कम से कम मैंने तो नहीं सुनी । और लोगों ने सुनी हो तो वह अलग बात है ? आपने एक चीज कई बार देखी होगी । पर आपको यह पता नहीं होगा । कि वो चीज या आकृति है क्या ? यधपि योगियों और संतों के लिये वह रहस्य नहीं है ? ये चीज है । हमारी आंखों के ठीक सामने आठ नौ इंच दूरी से लेकर सात आठ फ़ुट दूर बनने वाली विभिन्न प्रकार की कंकाल जैसी आकृतियां । कई बार इस रहस्यमय चीज को मैंने बनाऊ ढोल टायप साधुओं से पूछा कि ये क्या है । तो उन्होंने जबाब दिया कि ये तुम्हारे जितने जन्म हो चुके हैं । उनके कंकाल दिखते हैं ? वास्तविकता ये नहीं है ? ये आकृतियां दरअसल हमारी चित्तवृतियां हैं । अब आप अलग अलग मानसिक स्थितियों में इसका प्रयोग करके देखना । जब चित्त में विचार घनीभूत होंगे आकृति बडी बनेगी । विचार हल्के होंगे आकृति छोटी बनेगी । मन में जिस तरह के और जितने विचार होंगे । ये आकृति उसी तरह की बनेगी । एक खास बात ये होती है कि मन की शुद्धता और गंदगी या तामसिकता के आधार पर इसका रंग काला सफ़ेद के अनुपात में अंतर होगा । दिव्यता य़ा पवित्र भाव होने पर सफ़ेद अधिक दिखेगा । और वासनात्मक या निराशात्मक भावों की अधिकता होने पर काला अधिक दिखेगा । अब मान लीजिये किसी समय आपके मन में विचार बना । कल मुझे दिल्ली जाना है । इस चित्त के विचार का एक वृत बन गया । तभी विचार आया । बच्चे की फ़ीस जमा करनी है । दूसरा वृत । बीबी के लिये साडी लानी है । तीसरा वृत । बिजली का बिल भरना है । एक और वृत । इस तरह इन विचारों के हल्के भारी भाव के अनुसार कंकाल सी दिखने वाली आकृति में गोले बनते हैं । जिनको ध्यान क्रिया का अच्छा अभ्यास है । वे
यह बात गौर करके देखें कि जिस समय अनुलोम विलोम क्रिया और ध्यान एकाग्रता से मन विचारशून्य हो जाता है । उस समय ये आकृति दिखाई देनी बन्द हो जाती है । त्राटक के अच्छे अभ्यासियों को भी ये दिखाई नहीं देगी । तो अब आप कई बार ये प्रयोग करके देखना । ये आपकी मानसिक स्थित का एकदम सही पता बताती है । इसको बार बार देखने से योग की अच्छी स्थिति बनती है । और बहुत से फ़ालतू विचार नष्ट हो जाते हैं । इसको बार बार देखने से कई रोग भी ठीक हो जाते हैं । और मन बडी तेजी से साफ़ होकर नियन्त्रण में होने लगता है । न मानों तो करके देखना । अगर पहले आपने कभी नहीं किया । तो शुरूआत में कालापन अधिक दिखाई देगा । और इसको प्रतिदिन देखते रहने पर उसमें सफ़ेदी की मात्रा बडती जायेगी । और तब आप एक अजीव सी फ़ुर्ती और उत्साह अनुभव करेंगे । ज्यों ज्यों आप इसको देखते जायेंगे । इसके कई रहस्य खुलते जायेंगे । हालांकि अलौकिक ग्यान के रहस्य में यह कोई बडी तोप नहीं है । पर जो कुछ नहीं जानते । उनके लिये बहुत है । दूसरे ये तीन काम खास करती है । चिडचिडापन और अवसाद हटाना । दूसरा कुम्भ स्नान की तरह आपके मन से पाप धोना या मन को शुद्ध करना ।तीसरा सभी बीमारियां या वासनायें मन के विकार के कारण हीं होती हैं । इसलिये ये क्रिया आश्चर्यजनक रूप से फ़ायदा करती है ।
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" जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । " " सुखी मीन जहाँ नीर अगाधा । जिम हरि शरण न एक हू बाधा । " विशेष--अगर आप किसी प्रकार की साधना कर रहे हैं । और साधना मार्ग में कोई परेशानी आ रही है । या फ़िर आपके सामने कोई ऐसा प्रश्न है । जिसका उत्तर आपको न मिला हो । या आप किसी विशेष उद्देश्य हेतु
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